Pathwari by Dharmendra Rajmangal

Pathwari

by Dharmendra Rajmangal

ख़ुशी ख़ुशी घर से निकली छबीली और उसकी बेटी मोनी को क्या पता था कि जब वो लौटकर घर को आएँगी तब तक उनका सब कुछ उनसे छिन चुका होगा? कोई उनके ही गाँव का, उनकी ही पहचान का उनके साथ दरिंदगी कर देगा? दोनों को क्या पता था कि माँ के सामने बेटी को और बेटी के सामने माँ को नोंच खाएगा? कुछ और करने गयीं लेकिन जब लौटीं तो कुछ और हो गया. ख़ुशी की खबर तो मिली लेकिन इस दरिंदगी के बाद से उसका ध्यान तक मन में न आता था. छबीली तो घर से गयी थी कि अपने मायके से अपनी बेटी की शादी के लिए कुछ मदद मांग लेगी. मदद तो मिली लेकिन रास्ते में कुछ ऐसा हुआ कि सारा अरमान ही बिखर गया. मोनी को तो कोई अपने घर की बहू बनाने तक को तैयार न था. क्योंकि उसका बलात्कार हो गया था. सोच थी और है भी कि ऐसे लडकी को कौन घर में लाये जिसका बलात्कार हो चुका है.

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Dharmendra Rajmangal is a Hindi writer and novelist, was born (28 June 1993) in Hathras District Uttar Pradesh. He is the first writer of his village Panchayat, history of 100 Years, whose writings prominently featured realism. His novels describe the problems of the Indian Women, poor and the urban middle-class. He used literature for the purpose of arousing public awareness about national and social issues and often wrote about topics related to corruption, child widowhood, prostitution, the feudal system, poverty.

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